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दुर्गा भागवत के उद्धरण

मुक्त दु:ख अभिनव प्रज्ञा देता है। उसे पुराने अनुभव के भारी संपुट में बंद करने से उसकी शक्ति कम हो जाती है।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर