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दुर्गा भागवत के उद्धरण

भारतीय समाज की जाति की चारदीवारी इतनी ऊँची और मजबूत है कि उसे लाँघना असंभव है। जाति के बाहर कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका जीवन कूड़े की तरह होता है।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर