Font by Mehr Nastaliq Web

मैनेजर पांडेय के उद्धरण

जैसे प्रकृति के बिना किसान का जीवन अधूरा होता है, वैसे ही प्रकृति की उपेक्षा करनेवाली किसान-जीवन की कविता भी अधूरी होगी—यह बात किसान-जीवन की समग्रता का कवि जानता है।