Font by Mehr Nastaliq Web

स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

मैं संसार के इन झमेलों और संघर्ष के लिए नहीं बना था। वास्तव में मैं स्वप्नविलासी और आरामतलब हूँ। मैं जन्मजात आदर्शवादी हूँ, सिर्फ़ सपनों की दुनिया में रह सकता हूँ। वास्तविकता का स्पर्श मात्र मेरी दृष्टि धुँधली कर देता है और मुझे दुःखी बना देता है।