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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

मुक्ति केवल उसके लिए है, जो दूसरों के लिए सर्वस्व त्याग देता है; परंतु वे लोग जो 'मेरी मुक्ति-मेरी मुक्ति' की अहर्निश रट लगाए रहते हैं, वे अपना वर्तमान और भावी वास्तविक कल्याण, नष्ट कर इधर-उधर भटकते रह जाते हैं।