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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

मैं स्वयं यदि कोई झूठ कहूँ तो उससे जो पाप होता है, उतना ही पाप तब भी होता है; जब मैं दूसरे को झूठ कहने में लगाता हूँ, अथवा दूसरे की किसी झूठ बात का अनुमोदन करता हूँ।