Font by Mehr Nastaliq Web

अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

खेल का नशा छूट जाने पर खेल रुक जाता है, किंतु लीला का समापन नहीं होता है, लीला करते जाने में अपसाद नहीं होता है, आजीवन रूपांकन में दक्ष व्यक्ति के पाल लीलामयी, मायामयी विश्वरूपिणी लीला करती रहती है।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी