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भर्तृहरि के उद्धरण

केवल वह वाणी; जो संस्कार युक्त धारण की गई हो, वही पुरुष को भूषित कर सकती है। अन्य सब भूषण अवश्य क्षय हो जाते हैं, परंतु केवल वाणी का ही भूषण निरंतर वर्तमान रहता है।