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भर्तृहरि के उद्धरण

क्लेशित जन यदि धैर्यवृत्तिवाला हो जाए; तो उसकी धैर्यवृत्ति को कोई नहीं मिटा सकता। जैसे प्रज्वलित अग्नि को उलट दें; तो भी ज्वाला ऊपर ही को रहती है, नीचे नहीं जाती।