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कुँवर नारायण के उद्धरण

कविता मनुष्य के दिल और दिमाग़ के जितना ही नज़दीक अपनी जगह बनाएगी, उसके लिए जीवित रहना उतना ही संभव और अर्थपूर्ण होगा।