Font by Mehr Nastaliq Web

स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

कर्तव्य तो एक व्यर्थ की बकवास है। मैं मुक्त हूँ—मेरे सारे बंधन कट चुके हैं। यह शरीर कहीं भी रहे या न रहे, इसकी मुझे क्या परवाह।