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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

जो पूर्ण योगी होना चाहते हैं, उन्हें स्त्री-पुरुष भेद का भाव छोड़ देना पड़ेगा। आत्मा का कोई लिंग नहीं है—उसमें न स्त्री है, न पुरुष; तब क्यों वह स्त्री-पुरुष के भेदज्ञान द्वारा अपने आपको कलुषित करे?