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श्रीमद् राजचंद्र के उद्धरण

जो बंधन के कारण हैं, वे बंधन के मार्ग हैं। उनका नाश करने वाली आत्मा की शुद्ध अवस्था मोक्षमार्ग है कि जिससे भवभ्रमण का अंत होता है।