श्रीमद् राजचंद्र के उद्धरण
जो भी संयोग दिखाई देते है, वे आत्मा द्वारा ही अनुभव में आते हैं। उन संयोगों से आत्मा उत्पन्न नहीं होता है। आत्मा नित्य प्रत्यक्ष है।
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