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गजानन माधव मुक्तिबोध के उद्धरण

जिए जानेवाले और भोगे जानेवाले वास्तविक जीवन द्वारा ही, समीक्षक के मान-मूल्य और समाजशास्त्रीय दृष्टि अनुप्रणित होनी चाहिए।