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महादेवी वर्मा के उद्धरण

जिस क्रम से मनुष्य सभ्यता के मार्ग पर अग्रसर होता गया, उसी क्रम से समाज के नियम अधिकाधिक परिष्कृत होते गए और पूर्ण विकसित तथा व्यवस्थित समाज में वे केवल व्यावहारिक सुविधा के साधनमात्र न रह कर, सदस्यों के नैतिक तथा धार्मिक विकास के साधन भी हो गए।