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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

जिन्होंने रक्त की जगह पसीना भी न बहाया हो, जो स्वयं निरंकुश हों और जिन्होंने करोड़ों भाई-बहनों को ग़ुलामी की बेड़ी से जकड़ रखा हो, उन्हें हाथ-पैर हिलाए और ऊँचे उठे बिना आशा भी नहीं रखनी चाहिए कि संसार कि संसार उन्हें मनुष्य भी समझेगा।