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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

जिन भावों की जड़ें हिल गई हैं, यदि उनका स्थान ग्रहण करने को अन्य उपयोगी भावों को अवसर न दिया गया तो हृदय, हृदय नहीं रह जाएगा।