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दुर्गा भागवत के उद्धरण

भारतीय पातिव्रत्य की नैतिकता को चुनौती देकर, राधा ने एकनिष्ठ प्रीति का चाँदनी से भरा हुआ पूरा सौंदर्य उद्घाटित किया।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर