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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

भारत! यदि भविष्यत्-कल्याण का आवाहन करना चाहते हो, तो संप्रदायगत विरोध को भूल कर; जगत् के पूर्व-पूर्व गुरुओं के प्रति श्रद्धासंपन्न रहो और अपने मूर्त्त एवं जीवंत गुरु या भगवान में आसक्त हो जाओ, एवं उन्हें ही स्वीकार करो जो उनसे प्रेम करते हैं

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद