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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

भारत की अवनति तभी से आरंभ हुई; जब से भारतवासियों के लिए अमूर्त्त भगवान असीम हो उठे, ऋषियों को छोड़ कर ऋषिवाद की उपासना आरंभ हुई।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद