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गजानन माधव मुक्तिबोध के उद्धरण

आंतरिक जीवन के अपने भीतर विरोध होते है, अपना तनाव होता है। उसमें पनपने और तड़पने वाले अनेकानेक अनुभव और महत्त्वपूर्ण सत्य, अभिव्यक्ति—कलात्मक अभिव्यक्ति—प्राप्त नहीं कर पाते।