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मृणाल पाण्डे

1946 | टीकमगढ़, मध्य प्रदेश

मृणाल पाण्डे का परिचय

समादृत लेखिका और पत्रकार मृणाल पाण्डे का जन्म 26 जनवरी 1946 को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ हुआ। मृणाल पाण्डे की प्राथमिक शिक्षा नैनीताल में हुई। इसके बाद इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अँग्रेज़ी साहित्य से एम.ए. किया। संस्कृत, प्राचीन भारतीय इतिहास के साथ-साथ उन्होंने गंधर्व महाविद्यालय से संगीत विशारद तथा कॉरकोरम स्कूल ऑफ़ वाशिंगटन से चित्रकला एवं डिजाइन का विधिवत अध्ययन किया। साठोत्तरी स्त्री-कथाकारों में मृणाल पाण्डे का विशेष स्थान है। मृणाल पाण्डे कई वर्षों तक विभिन्न विश्वविद्यालयों (प्रयाग, दिल्ली, भोपाल) में अध्यापन के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आईं। ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘वामा’ तथा ‘दैनिक हिन्दुस्तान’में  उन्होंने बतौर संपादक कार्य किया। वह ‘कादंबिनी’और ‘नंदन’ से जुड़ीं रहीं। उन्होंने ‘स्टार न्यूज़’ और ‘दूरदर्शन’ के लिए हिंदी समाचार बुलेटिन का संपादन किया। वर्ष 2010 से 2014 तक प्रसार भारती की चेयरमैन भी रहीं। 

‘विरुद्ध’, ‘पटरंगपुर पुराण’, ‘देवी’, ‘हमका दियो परदेस’, ‘अपनी गवाही’ (उपन्यास); ‘दरम्यान’, ‘शब्दवेधी’, ‘एक नीच ट्रैजिडी’, ‘एक स्त्री का विदागीत’, ‘यानी कि एक बात थी’, ‘बचुली चौकीदारिन की कढ़ी’, ‘चार दिन की जवानी तेरी’ (कहानी-संग्रह); ‘मौजूदा हालात को देखते हुए’, ‘जो राम रचि राखा’, ‘आदमी जो मछुआरा नहीं था’, ‘चोर निकल के भागा’, ‘संपूर्ण  नाटक’ (नाटक) और देवकीनन्दन खत्री के उपन्यास ‘काजर की कोठरी’ का इसी नाम से नाट्य-रूपान्तरण; ‘परिधि पर स्त्री’, ‘स्त्री : देह की राजनीति से देश की राजनीति तक’, ‘स्त्री : लंबा सफ़र’ उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं। मृणाल पाण्डे की माँ 'गौरा' उर्फ़ शिवानी हिंदी साहित्य की प्रतिष्ठित लेखिका रही हैं। उनका साहित्य स्त्री के विभिन्न पक्षों की ओर ध्यान दिलाता है। 21 वर्ष की उम्र में उनकी पहली कहानी ‘धर्मयुग’ में छपी। तब से वो लगातार लेखन कर रही हैं। उनके लेखन में वर्ग भेद, छुआछूत, दहेज प्रथा, बाल विवाह, सती प्रथा और यौन रोग जैसी अनेक सामाजिक समस्याओं को देखा जा सकता है। 

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