एल्बर्ट हबर्ड के उद्धरण
हर पिता चाहता है कि उसके बच्चे वैसे ही श्रेष्ठ बनें, जैसा वह स्वंय बनना चाहता था।
अनुवाद : रचित
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कम से कम पाँच मिनट के लिए तो प्रत्येक व्यक्ति प्रति-दिन मूर्ख बनता ही है। हमारी बुद्धिमानी इसी में है कि पाँच मिनट की अवधि को बढ़ने न दें।
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