दुर्गेश कुमार सजल के बेला
28 अप्रैल 2026
दो ग्रह, दो भाषाएँ : पृथ्वी और मंगल के साहित्य का अनुवाद-विमर्श
पिछले दिनों गाँव में परफैरा हुआ, कुछ लोग मच्छी मार्केट लगाए बतिया रहे थे। वे क्या बात कर रहे थे और उसका अर्थ क्या था? कुछ नहीं सूझ रहा था! वे या तो गाली-गलौज कर रहे थे या फिर अर्थ पर ध्यान दिए बग़ैर