अनुभव के बेला
साथ निभाने की कला
संबंधों के बिना मानव जीवन कितना शांत और सरल है। लेकिन ऐसी शांति और सरलता किस काम की जिसमें मानव किसी से दो बातें न कह सके। किसी के ऊपर चिल्ला न सके। उससे झगड़ न सके। झापड़ न मार सके या बदले में उससे झा
1997 | लखनऊ, उत्तर प्रदेश
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और कलाकार।
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और कलाकार।
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