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कोरोना के कहर

korona ke kahar

अनीता साह

अनीता साह

कोरोना के कहर

अनीता साह

और अधिकअनीता साह

    भय, पीड़ा संत्रास भरल, साल बितल दुखदायी।

    कोरोना के दानव आके, कइलख धाराशायी॥

    मजुरन के जीवन में संकट, सबके छूटल धंधा।

    तालाबंदी के अगिया से, व्यापार भइल मंदा॥

    अदमी अपना अपना धुन में, देखे ना कमजोरी।

    गलती कइके हरदम कइलख, खूबे सीनाजोरी॥

    बाकिर सृष्टि करत बा हरदम, आपन लेखाजोखा।

    गलत सही के भाँप सकेला, रंग दिखावे चोखा॥

    पृथ्वी अग्नि हवा सूरज भी, आपन रस्ता खोले।

    रोकेला जे नियम जगत के, धरती तबहीं डोले॥

    आई नवका साल सँवारी, होखो मन अब सादा।

    धर्म सनातन याद रखे के, कइले जाईं वादा॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गुजर रहल बा जिन्दगी (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 6)
    • रचनाकार : अनीता साह
    • प्रकाशन : ओरिएन्टल पब्लिकेशन हाउस प्रा. लि., काठमांडू, नेपाल
    • संस्करण : 2025

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