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बड़ा किसान

baDa kisan

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

बड़ा किसान

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    गउना के बड़ा किसान हई, हम मनई चतुर सुजान हई

    दुस्मन ससुरेन बेइमान कहइँ, पर बहुत नेक इंसान हई।

    बाबू एक बात बताइ मरेन, ओका टोंके गठिआइ लिहा

    खेतवा चाहे परती राख्या, मेड़वा के जिनि बिसराइ दिह्या,

    बाबू बुधि कंठ समाइ गई, तुरतइ टेकटर बोलवाइ लिहा

    समझाइ डरेबर के काने मेड़वा दुइ फिट पिछराइ दिह्या।

    पच्छू कइती चकरोट रहा हम गिद्ध निगाह गड़ाइ दिहा

    अबकी अषाढ़ में आँख मूँदि चकरोटउ कुल जोतवाइ लिहा,

    तोंहसे का झूठ कहीं भइया दस बिस्सा रहा मोर हिस्सा

    दुइअइ तूरे में कइ डावा रकबा पूरा सोरह बिस्सा।

    बाबू के मन्तर काम आइ मेहनत के पूरा दाम आइ

    देख्या केतना बुधिमान हई, गउना के बड़ा किसान हई।

    गेहूँ सत्तर बोरा बेंची चाहे खाइउ के आँटइ

    दुइ चार भँइस लागइ हरदम लरिकन रोटी नुन्चा चाटइ,

    सबके खेती देई चराई आपन भूसा बेचवाइ दिहा

    भूसा बेंचा ईंटा खरीद घरवा पे छत डलवाइ लिहा।

    आधी रतिअइ लरिकन जगाइ सबके महुआ लेईं बिनाइ

    आन्ही में आम बिनइ खातिर बहुआ के मइ देईं जगाइ,

    गोबर चोराइ उपरी पाथइ लछिमी बा हमरे घर वाली

    नहिं पड़ा खरीदइ आज तलक हमका एकउ लोटा थाली।

    घर भर मिलि के गिरही बनवाँ सहलेन नाहीं धनवान हई

    गउना के बड़ा किसान हई।

    धन-दौलत जान परान मोर सग्गइ भाइउ के ना छोड़ा

    दस दिहा, वसूला दस हजार हर माह दु दुइ जीरो जोड़ा,

    बाबूजी के तेरही कइके भाई के खेत लिखाइ लिहा

    माई के गहना हजम किहा कुल मोहर खाइ पचाइ लिहा।

    रुपिया-पइसा, घर गाइ-भँइस कुल हजम किहा लोटा टाठी

    कर्जा में हिस्सा बाँट दिहा बोला हम गलत कहाँ बाटी?

    एतनेउ पे भाई बिभीसन भा बनिग मुद्दइन के संगी

    खुनवा के रिस्ता भूलि गवा मउका पावइ मारइ लंगी।

    मइ फूँकि फूँकि हर पाँव धरीं भइया बहुतइ संतोस करी

    हम किरिया खाइ कहीं तोहसे झूँठइ नाहीं हम दोष धरी,

    तोहईं सब मिलि के समझावा ओका रस्ते पे लइ आवा

    ओसे बहुत हैरान हई, गउना के बड़ा किसान हई।

    दस बीस गाँव में नाम मोर सबके पंचाइत करवाई

    बिन पेनी के लोटा भइया जेहि ओर वोजन मइ झुकि जाई,

    हर बरस कराईं बीसन ठू अलगौझी भाई भाई मा

    भुतही पंचाइत में माहिर जुझवाईं मेड़ जोताई मा।

    जइसे मनई वोइसे पनही लरिकइंयै बाबू बतलाएन

    गइयौ गाभिन बरधौ गाभिन महामंत्रवा सिखलाएन,

    थाना नाका मुंसी पटवारी से पहिचान बनाइ लिहा

    भइया तोहरइ सबके किरपा खुब नाम अउ दाम कमाइ लिहा।

    घर बाहेर अहै बड़ी इज्जत घर के भीतर लतखोर हई

    मेहरारू के लेखे झुट्ठा बहुओ के लेखे चोर हई,

    सब साँझ सबेरे फटकारैं कुकुरे के जइसे दुतकारैं

    घर भीतर चाहे जस बीतइ पर बीसन गाँव के सान हई।

    गउना के बड़ा किसान हई।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 27)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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