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आकस्मिक हत्याएँ

akasmik hatyayen

अवनीश यादव

अवनीश यादव

आकस्मिक हत्याएँ

अवनीश यादव

और अधिकअवनीश यादव

    वे हत्याएँ करतें है

    हर रोज ही किसी न किसी की

    वे डरते नहीं है,

    हत्या करने से

    क्योंकि कोई अपना उनकी हत्या कर चुका है,

    कोई अपना उनकी हत्या कर चुका है

    इसलिए अब वो भी कर देते है हत्या,

    किसी न किसी की हत्या होती ही रहती है

    बार-बार हर बार,

    हत्याएँ उनकी भी हो जा रही है

    जिन्होंने कभी नही की किसी हत्या की बात,

    जो बहुत जीना चाहते थे

    हत्या उनकी भी हुई है

    कभी जंगल के बीचों बीच,

    तो कभी नदी के किनारे,

    तो कभी इन सबसे परे

    सुनसान सड़क पर,

    कारण देखा जाए तो बस एक ही

    कभी प्रेम मे जीने से,

    तो कभी प्रेम में होने से,

    मै भी अब इसी ख़्याल में आना चाहता हूँ

    जहाँ के बाद मेरी भी हत्या होनी चाहिए,

    क्योंकी मै जीवित नहीं रहना चाहता हूँ

    मेरे ना जीने के ख़्वाइस में,

    मै बचा लेना चाहता हूँ उन एक-दो का जीवन

    जो आख़िर तक मरना नहीं चाहते है

    कुछ के जीवित रहने की इच्छा ही

    मुझें खींचती है हर रोज़ मृत्यु के क़रीब

    बार-बार लगातार ही,

    मै जीवित नहीं रहना चाहता था

    इसका कत्तई मतलब यह नही था

    कि मै अभी-अभी मर जाना चाहता हूँ

    लेकिन कुछ एक-दो जो मेरे ही आस में

    बैठे है और प्रतीक्षा कर रहे है

    इस उत्कुंठा में

    कि मेरे ही मर जाने से वो बच जाएँगे,

    तो अब मै अपने मृत्यु को उनके जीवन से

    समझौता करवा देना चाहता हूँ

    स्रोत :
    • रचनाकार : अवनीश यादव
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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