मरल भूईं के बउराइल हवा हम
maral bhuin ke baurail hava hum
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
मरल भूईं के बउराइल हवा हम
maral bhuin ke baurail hava hum
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
मरल भूईं के बउराइल हवा हम।
कहाँ से आ गइल बानी कहाँ हम॥
उड़ा के ले चलल हमरा के दुनियाँ—
उहें बानी रहीं जहँवा खड़ा हम॥
बहुत दिक्कत में अब जीए के बाटे
कोठरी बंद अउँजाइल धुँआ हम॥
समय अब ना बनी कबहूँ सोहागिन
बा विधवा हर दिसा करिआ घटा हम॥
दीआ—जिनगी पर राखल बा अलोते—
उदासल साँझ के लुक-झुक दीआ हम॥
बसंती पियार के अब का भरोसा
दरद पतझड़ के माँगी ले दुआ हम॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 16)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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