कुछ लोग नजर आइल, दूर गइला के बाद
kuch log najar aail, door gaila ke baad
कुछ लोग नजर आइल, दूर गइला के बाद
बदल गइल बोली, मजबूर भइला के बाद
पहिले रहत रहे ऊ हरदम, हमरा आगे पीछे
अब नजर नइखे आवत, लूर भइला के बाद
पहिले बात देखावेऽ, अब औकात देखावेला
धन सम्पति के नशा में, चूर भइला के बाद
बाजार के छईंटा में ना, ऊ बक्सा में रहेला
समयचक्र में आम से, अंगूर भइला के बाद
अब दिल के ना खाली दिमाग के बात करे
दया भाव ओरागइल, निठुर भइला के बाद
- पुस्तक : बेचैन संदेश (भोजपुरी गजल-संग्रह) (पृष्ठ 9)
- रचनाकार : शिव संदेश
- प्रकाशन : भोजपुरी प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमांडू, नेपाल
- संस्करण : 2024
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