हिया में धुआँइल, करेजा के आग
hiya mein dhuanil, kareja ke aag
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
हिया में धुआँइल, करेजा के आग
hiya mein dhuanil, kareja ke aag
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
हिया में धुआँइल, करेजा के आग!
नयन में बराइल, करेजा के आग!!
हरेक कंठ में गीत बनि—जी रहल
सुकवि से रचाइल, करेजा के आग!!
पलानी से महलाद पर जा चढ़ल
ना धइले धराइल, करेजा के आग!!
बहुत ताव खाके लसारत बा लोग
ना मिसले मिसाइल, करेजा के आग!!
दुआरी के सासत ह अँगना के लोर
बा सुखले तँवाइल, करेजा के आग!!
बा दहकत अंगोरा सबद पीर के
गजल में गथाइल, करेजा के आग!!
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 24)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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