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हमरा छत पर इँजोरिया ई टहले लागल

hamra chhat par injoriya ii tahle lagal

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

हमरा छत पर इँजोरिया ई टहले लागल

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

    हमरा छत पर इँजोरिया टहले लागल।

    साँच पूछीं करेजा दहले लागल॥

    ओस में बा नेहाइल, मगर आग

    आज भीतरे में नागिन छहले लागल॥

    हमरा जिनगी के शोभा अमावस रहल

    कुछ अँधरिया बुझाइल कि सहले लागल॥

    हम इँजोरिया के कइसे दो सुआगत करीं

    इहवाँ मूरत चन्दरमा के ढहले लागल॥

    दूध धरती पर ना, नभ में छितरा गइल

    सोंच के तनिका मन हमरो बहले लागल॥

    जूड़ शीतल करेजा करेजा करें

    कइसें पतिआई सभ खाली कहले लागल॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 17)
    • रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
    • प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
    • संस्करण : 1996

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