हमहीं नइखीं सगरी दुनियां तोहरा पर दिवाना बा
hamhin naikhin sagri duniyan tohra par divana ba
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
हमहीं नइखीं सगरी दुनियां तोहरा पर दिवाना बा
hamhin naikhin sagri duniyan tohra par divana ba
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
हमहीं नइखीं सगरी दुनियां तोहरा पर दिवाना बा।
गजल-कुँवारी! तोहर मिसरा सुई जस चुभ जाना बा॥
चोट करेलू एतना तबहूँ सुहराबे सभ आपन घाव
कंठ बसेलू लागे तोहर सुर से भरल खजाना बा॥
दरद सहे के ताकत देलू एहसे भल का होखी बात
ई बतलाव, तोहरा दिल में कतिना दरद पुराना बा॥
बिनु पिअले सुनवइया झूमें बेहोशी के आलम में,
ना जाने तोहरा शेरन में कई गो दो मयखाना बा॥
जबे काफिया तंग पड़ेला गरदन पर चढ़ि जालू तूं,
शायर कवि से कहिइ देलू-ई कोशिश बचकाना बा॥
सभ केहू गढ़ ना पावेला, तोहर सुधर सुधर रुप,
उहें रचे जे रुप के दिअना खातिर बस परवाना बा॥
अंगुठी के नग शब्द, भाव के बंदिशबा तोहर पाजेब।
अरथ दुधारी नयन-कटारी नकशा बड़ा सुहाना बा॥
तेगअली, शैदा, सतीश, रिपुसूदन, जगन्नाथ, प्रभुनाथ
कपिल, विरल, केतने भोजपुरिया खाड़ तोहर पयताना बा।
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 41)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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