Font by Mehr Nastaliq Web

नइखे जानत के आवत बा

naikhe janat ke aavat ba

तैयब हुसैन पीड़ित

तैयब हुसैन पीड़ित

नइखे जानत के आवत बा

तैयब हुसैन पीड़ित

और अधिकतैयब हुसैन पीड़ित

    नइखे जानत के आवत बा, बुरा कि अच्छा, भाई जी!

    दहशत में कँपसल लउकत बा सबके बच्चा, भाई जी!

    कहाँ अमिरकी पेंटागन कहाँ ओसामा अफगानी

    सोंढ़ में हाथी के चिंउटी पइसल ना अच्छा, भाई जी!

    चाहे भरल रेलगाड़ी हो या मेला-ठेला के भीड़

    बा छल-प्रपंच में पक्का, भीड़ बा कच्चा, भाई जी!

    सून शहर बा, सहमल-सहमल गली-राह-घर-दरवाजा

    के एह सब दर-दीवारन के देता गच्चा, भाई जी!

    साधारण मनई देखीं केतना डरल-डरल बाड़न

    बे डर-भय के घूम रहल बा, चोर-उचक्का, भाई जी!

    स्रोत :
    • पुस्तक : सुर में सब सुर (पृष्ठ 66)
    • रचनाकार : तैयब हुसैन पीड़ित
    • प्रकाशन : शब्द संसार, पटना
    • संस्करण : 2011

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY