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बोल के सब साँच बतिया, झुठ के दुत्कार दीं

bol ke sab saanch batiya, jhuth ke dutkar deen

अनीता साह

अनीता साह

बोल के सब साँच बतिया, झुठ के दुत्कार दीं

अनीता साह

और अधिकअनीता साह

    बोल के सब साँच बतिया, झुठ के दुत्कार दीं,

    खूब सुख बेची मँगनिये, जे दुखी बा प्यार दीं।

    गैर खातिर जे जियेला, जिंदगी के शान बा,

    नाव बन हर वक्त डूबत के सदा पतवार दीं।

    धन अटारी लोभ लालच, झूठ के जंजाल बा,

    त्याग दीं आदत बुरा कमजोर के सत्कार दीं।

    के रहीं ईहां समय के चक्र रुकल बा कहाँ,

    रोब कवन बात के सबका मधुर व्यवहार दीं।

    मन सुधारी शान्त रहके, मन कलह हरदम करीं,

    मन बहक जाला अगर जे, ओइसन मन मार दी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : गुजर रहल बा जिन्दगी (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 112)
    • रचनाकार : अनीता साह
    • प्रकाशन : ओरिएन्टल पब्लिकेशन हाउस प्रा. लि., काठमांडू, नेपाल
    • संस्करण : 2025

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