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तोहार देह के छूके हवा गुजर जाई

tohar deh ke chhuke hava gujar jai

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

तोहार देह के छूके हवा गुजर जाई

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

    तोहार देह के छूके हवा गुजर जाई।

    बेमार लोग के हालत तनी सुधर जाई॥

    रूप-रस-अस तोहार गंध में समाइल बा,

    सुवास जिनगी के हर रंग में उतर जाई॥

    इआद आइल बहुत जे आजु ले रहे राही,

    हिया के गाँव के दुलहिन सजल सँवर जाई॥

    चान से लेके जे पिअलस अँजोर के अमरित,

    चकोर कइसे बताव पिआसे मर जाई॥

    गरीब लोग के बखरा लोर के पूँजी,

    नयन के छोर में अंटकल दिया टघर जाई॥

    उमिर के डेग बा डोलत जरा सम्हार तूं,

    बहार आके कहीं हाथ से बहर जाई॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 7)
    • रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
    • प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
    • संस्करण : 1996

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