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इयाद उनकर सगर रात आवत रहल

iyaad unkar sagar raat aavat rahal

तैयब हुसैन पीड़ित

तैयब हुसैन पीड़ित

इयाद उनकर सगर रात आवत रहल

तैयब हुसैन पीड़ित

और अधिकतैयब हुसैन पीड़ित

    काल्ह फेर रात में 'उ' ना अइलन सखी,

    इयाद उनकर सगर रात आवत रहल!

    जसहीं पछिमी पोखरिया में सूरुज डुबल

    साँझ सँउसे बगइचा में छितरा गइल,

    सुधि के रमुनी चिरइयां केने से दो

    मन के खोंतवा में चुपके से भितरा गइल,

    हम सहेजे में रहि गइलीं तिनका टुटत

    चोर हुटकुट के धिरजा ढहावत रहल!

    कबहूँ जाईं झटक के दुआरी लगे

    कबहूँ आईं सेजरिया तर मन मारे के,

    कबहूँ तुलसी के चउरा पर लहटल दिया

    अपना किस्मत नियर छोड़ दीं बार के,

    केहू खिड़की से मारे बरफ फेंक के

    बाट जोहे में केहू जरावत रहल!

    चान कइसन निलज गइल माथ पर

    झाँके ओरी-बँड़ेरी से अनकर धनी,

    हम चिहुक जाईं निसबद में दहसत से तब

    बन के नागिन ठनक जाय जब करधनी

    आँख मूँदे के कोरसिस में सपना सुतल

    दूर पपिहा पहरुआ जगावत रहल!

    लाख कइलीं पथर के करेजा तबो

    मान भितरे कहूँ से पसीझत रहल,

    साँच मानऽ, बरखा भइल बून भर

    बाकी अँचरा के सब खूँट भींजत रहल,

    हम रोअत रहलीं जाँता पर जँतसार में

    आस सउतिन मिलन-गीत गावत रहल!

    स्रोत :
    • पुस्तक : सुर में सब सुर (पृष्ठ 20)
    • रचनाकार : तैयब हुसैन पीड़ित
    • प्रकाशन : शब्द संसार, पटना
    • संस्करण : 2011

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