Font by Mehr Nastaliq Web

परदेस पिया के ना धारे!

pardes piya ke na dhare!

तैयब हुसैन पीड़ित

तैयब हुसैन पीड़ित

परदेस पिया के ना धारे!

तैयब हुसैन पीड़ित

और अधिकतैयब हुसैन पीड़ित

    परदेस पिया के ना धारे!

    केहू खाये लडुआ-बिस्कुट,

    हम खाएब सतुए पीस-कूट,

    बाकी केहू के अन-धन से

    ना बदलब आपन भाग-खूँट,

    देखब निस दिन मुख-चनवा रे!

    परदेस पिया के ना धारे!

    चरमहला हमके ना भावे,

    मड़ई में मन मंगल गावे,

    के दिल पथरावो पाती से

    ना नीन पपिहरो के आवे,

    जब घिरे बदरवा कजरारे!

    परदेस पिया के ना धारे!

    रंगरेजी साड़ी ना पहिनब,

    मोटिहे से तन के आड़ करब,

    बाकी सुनसान अँगनवा में

    हम उनके आगे मांग भरब,

    रे बइठब कबो ना मनमारे!

    परदेस पिया के ना धारे!

    जिनगी के कवन ठेकाना बा,

    जब अइसन भइल जमाना बा,

    सब मिली, पिरतिया ना मिलिहें

    जब लये ना, तब का गाना बा?

    एही से तज के सुख सारे!

    हम कहत रहब हरदम प्यारे!

    परदेस पिया के ना धारे!

    स्रोत :
    • पुस्तक : सुर में सब सुर (पृष्ठ 17)
    • रचनाकार : तैयब हुसैन पीड़ित
    • प्रकाशन : शब्द संसार, पटना
    • संस्करण : 2011

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY