कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइलै
kaune naresva ka desva ujari gailai
रामजियावान दास ‘बावला’
Ramjiyaavan Das ‘Bawla’
कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइलै
kaune naresva ka desva ujari gailai
Ramjiyaavan Das ‘Bawla’
रामजियावान दास ‘बावला’
और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’
कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइलै केकरे दुवरिया न छाँव,
ए बबुआ आज रहि जा हमरे गाँव॥
सेवा में चूकब न साधन जुटइबै।
आयसु जवन होई जहवाँ क जइबै।
रचिको न करिहा अन्देसवा कलेसवा क देखा देखाइ देहीं ठांव॥
केकर करेजवा बजर कै सँवारल।
कवने अहेरिया क अइला तूँ मारल।
जउने नगरिया क हउवा अँजोरिया हमरा से कहि देता नांव॥
जियरा दरकि जाला सुनि के अनीती।
चौदह बरिस कइसे बनवा में बीती।
हमहन के अर्जी पर मर्जी बताय दा मत सोचा दाहिन बाँव॥
अमिरित सरिस बोलि जियरा जुड़ावा।
मड़ई गँवारन क पावन बनाया।
सब बावला बाटै सेवा में तोहरे रूक जा थकल होई पांव॥
- पुस्तक : गीतलोक (पृष्ठ 73)
- रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
- प्रकाशन : सेवक प्रकाशन, वाराणसी
- संस्करण : 1997
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