इतिहास सिखाता है कि पके हुए बालों की जटा को जब सनातन समझकर उसकी पूजा की जाती है, तो वही जटा फाँस बनकर गला घोटती है।
पदार्थ की नई अवधारणा, पुरानी अवधारणा का परिष्कार मात्र है।
इतिहास सिखाता है कि पके हुए बालों की जटा को जब सनातन समझकर उसकी पूजा की जाती है, तो वही जटा फाँस बनकर गला घोटती है।
पदार्थ की नई अवधारणा, पुरानी अवधारणा का परिष्कार मात्र है।
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