भविष्य पर बेला
भविष्य आशंकाओं-आकांक्षाओं
के वर्तमान के रूप में हमारे जीवन-दृश्यों में उतरता रहता है। इस चयन में ऐसी ही कुछ कविताओं का संकलन किया गया है।
विज्ञान कथा : दंभ
अप्रैल, सन् 2101 यूँ धरती के सीने पर उगी आधुनिकतम संरचनाओं ने उसे एक विशिष्ट सौंदर्य प्रदान किया है, लेकिन कुछ ज़ख़्म ऐसे हैं जो छिप नहीं पाते। ये ज़ख़्म जलवायु परिवर्तन ने दिए हैं। अप्रैल-मई माह
‘2147’ : भविष्य की एक ज़रूरी चेतावनी
लीलानूर सेंटर फ़ॉर वॉयस एंड डांस में पारंगद शॉ द्वारा लिखित और बलराम झा द्वारा निर्देशित नाटक ‘2147’ का मंचन—कैटेलिस्ट थिएटर सोसायटी और काव्यपीडिया के संयुक्त तत्वावधान में—सफलता के साथ किया गया। यह
पत्र : अभिभावकों-सहयात्रियों-कला में विश्वास रखने वालों के नाम
भोपाल 25 मई 2025 प्रिय अभिभावकों, सहयात्रियो और कला में विश्वास रखने वालों के प्रति... विहान ड्रामा वर्क्स : ‘स्वप्नयान—बाल नाट्य कार्यशाला’ में भाग लेने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों को ढेर