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वेंकी रामकृष्णन के उद्धरण

ज़रूरी नहीं कि स्वस्थ बुढ़ापे की दिशा में होने वाली प्रगति, हमें बाद के वर्षों में भी युवावस्था जैसा रचनात्मक और कल्पनाशील बनाए रखे। युवा दुनिया को नई नज़रों से और नए तरीक़ों से देखते हैं।

अनुवाद : अमित कुश