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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

योगी दावा करते हैं कि मनुष्यदेह में जितनी शक्तियाँ हैं, उनमें ओज सब से उत्कृष्ट कोटि की शक्ति है। यह ओज मस्तिष्क में संचित रहता है। जिसके मस्तिष्क में ओज जितने अधिक परिमाण में रहता है, वह उतना ही अधिक बुद्धिमान् और आध्यात्मिक बल से बली होता है।