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भर्तृहरि के उद्धरण

विघ्न के भय से नीचजन कार्य को आरंभ ही नहीं करते, और मध्यजन पहले आरंभ करके; पुनः विघ्न को देख कार्य को छोड़ कर बैठ जाते हैं, और उत्तमजन बारंबार विघ्न के आने पर भी, कार्य आरंभ करके उसका परित्याग नहीं करते अर्थात् उसको पूरा ही करके छोड़ते हैं।