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भर्तृहरि के उद्धरण

वे श्रेष्ठ निश्चित ही विपरीत समझवाले हैं, जिन्होंने स्त्रियों का नाम अबला रखा है; क्योंकि जिनकी चंचल पुतलियों के कटाक्ष से इंद्रादिक भी हार मानते हैं, भला कहो, वे अबला कैसे हैं?