तुमने यदि ऐसी शक्ति प्राप्त कर ली है; जिससे चंद्र-सूर्य को कक्षच्युत कर सकते हो, पृथ्वी को तोड़कर टुकड़ा-टुकड़ा कर सकते हो या सभी को ऐश्वर्यशाली कर दे सकते हो, किंतु यदि हृदय में प्रेम नहीं रहे, तो तुम्हारा कुछ हुआ ही नहीं।
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद