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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

तुम्हारी थोड़ी-सी उन्नति होने से ही देखोगे किसी ने तुम्हें ठाकुर बना दिया है, कोई महापुरूष कहता है, और फिर कोई सद्गुरु इत्यादि कहता है; और फिर कोई शैतान, बदमाश, कोई व्यवसायी इत्यादि भी कहता है। सावधान! तुम इनमें से किसी की ओर ध्यान मत देना। तुम्हारे लिए ये सभी भूत हैं, ध्यान देने से ही गर्दन पर सवार हो जाएँगे, उससे छुटकारा पाना भी महामुश्किल है। तुम अपने अनुसार काम किए जाओ, चाहे जो हो।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद