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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

तुम्हारा मन सत् या ब्राह्म में विचरण करे; किंतु शरीर को गेरूआ या रंग-ढंग से सजाने में व्यस्त मत्त होओ, ऐसा करने से मन शरीरमुखी हो जाएगा।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद