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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

तुम असत् में जितना ही आसक्त होगे, उत्तना ही स्वार्थबुद्धिसंपन्न होगे और उतना ही कुज्ञान या मोह से आच्छन्न हो पड़ोगे और रोग, शोक, दारिद्रय, मृत्यु इत्यादि यंत्रणाएँ तुम पर उतना ही आधिपत्य करेंगी, यह निश्चित है।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद